26 November 2025
Image Credit: Canva
दुनिया में हर साल 25 दिसंबर को ईसा मसीह के जन्मदिन के रूप में क्रिसमस मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन क्रिसमस-ट्री को सजाया जाता है और अन्य कई परंपराएं निभाई जाती है।
Image Credit: Canva
क्रिसमस हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है, ईसाई धर्म में क्रिसमस के त्योहार का खास महत्व है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ईसा मसीह का जन्म हुआ था, ईसाइयों के लिए यह बड़ा पर्व माना जाता है।
Image Credit: Canva
क्रिसमस के मौके पर क्रिसमस ट्री सजाने की परंपरा है, इस दिन घर को लाइट्स से सजाया जाता है। फ्रेंड्स और फैमिली को गिफ्ट्स दिया जाता है और चर्च जाकर प्रार्थना भी की जाती है। आइए जानते हैं कि क्रिसमस पर क्रिसमस ट्री सजाने का क्या महत्व है?
Image Credit: Canva
क्रिसमस के दिन घरों में क्रिसमस ट्री लगाकर उसे रंग-बिरंगे खिलौने, बॉल्स, चॉकलेट्स, रिबन और लाइट्स से सजाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, 16वीं सदी के ईसाई धर्म के सुधारक मार्टिन लूथर ने क्रिसमस-ट्री को सजाने की शुरुआत की थी।
Image Credit: Canva
मार्टिन लूथर 24 दिसंबर की शाम को एक जंगल से गुजर रहे थे, वह जंगल काफी बर्फिला था। वहां जंगल में मार्टिन लूथर को एक सदाबहार का पेड़ नजर आया। उस पेड़ की डालियों पर चांद की रौशनी पड़ रही थी। मार्टिन लूथर सदाबहार के पेड़ को अपने घर ले आये और पेड़ की सजावट की।
Image Credit: Canva
उसके बाद जीसस क्राइस्ट के जन्मदिन पर भी मार्टिन लूथर ने सदाबहार के पेड़ को सजाया और उसके बाद से ही क्रिसमस के मौके घर में क्रिसमस ट्री लाने और उसे सजाने का परंपरा शुरू हुआ।
Image Credit: Canva
क्रिसमस ट्री को लेकर यह भी चर्चित है कि 722 ईसवी में जर्मनी से क्रिसमस ट्री सजाने का रीति-रिवाज शुरू हुआ। एक बार जर्मनी के सेंट बोनिफेस को जानकारी मिली कि कुछ लोग एक विशाल ओक ट्री के नीचे बच्चों की कुर्बानी देंगे।
Image Credit: Canva
Image Credit: Canva
Image Credit: Canva